अपना अपना खून ले जाओ

खून बहा था सत्तावन में वो आजादी के दीवाने थे
ना हिन्दू थे ना मुस्लिम थे वो भारत माँ के परवाने थे
फिर क्यू आजाद भारत में अब लहू बहाए जाते हैं
कही गाड़ दिए जाते हैं हिन्दू तो कही मुस्लिम जलाये जाते है

देख तमाशा दंगो का, खून से सनी हुड़रंगो का

बंटवारा है यहाँ रंगो का ,पडोसी तो ख़ुशी मनाता हैं

मुल्क हमारा होता हैं शर्मिंदा ये इंसानियत पर चाटा हैं

राम रहीम के इस वतन में , सर शर्म से झुक जाता हैं

मरने वाला ना हिन्दू होता ना होता मुसलमान है
किसी का वो होता हैं बेटा , किसी के दिल की जान है

ये कैसी हैं मंदिर की पूजा , ये किस मज्जिद की अजान हैं

मुर्दे बन गए हम दिलो से , ये नफरतो का शमशान हैं

खून के आंसू रोते हैं अपने जब खून अपना चला जाता हैं

खून से सनी होती है भूमि वो खून भावनाओ को तड़पाता हैं
इस जमी पर फेले खून से चिल्ला चिल्ला के आवाज हैं आती

इस जमी पर फेले खून से चिल्ला चिल्ला के आवाज हैं आती

जो हिन्दू है जो मुस्लिम वो आओ यहाँ और बतलाओ

जो हिन्दू है जो मुस्लिम वो आओ यहाँ और बतलाओ
इन फेले खून के दरियो से अपना अपना खून ले जाओ

इन फेले खून के दरियो से अपना अपना खून ले जाओ