वो बारिश की बून्द

तपन के इस दुर्भिश में , वो अमृत की तरह छलकती रही ।
निभा कर साथ हवा का वो, निश्छल पथ से बहकती रही ।
ले आगोश में उस निरंकुश सूरज को,
नए अहसास सी वो मन में महकती रही ।
टपक पड़ी सुकून की बुँदे मेरे मुख मंडल पर ,
मोतियो की तरह वो दमकती रही ।
देकर नई जिंदगी नए अहसास दुनियां को
“वो बारिश की बुँदे” मटक मटक कर नव योवन सी
मदमस्त पल पल आसमाँ से बरसती रही।

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 02/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/10/2015

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