बारिश

आयी बहुत सी बारिशें ,
गुजरे बहुत से सावन |
झूम के बरसे बदरा ,
भीग गया तन मन |
सोचा कभी न ऐसा ,
आएगा ये मौसम |

बौछारों की लहरों में ,
होगा प्रथम मिलन |
सिमटी सी सकुचाई सी ,
बारिश में भीगी आई थी |
तेज हवाओं के झोकें से ,
जुल्फें भी लहरायी थी |
दो नैना चंचल चितवन थे ,
गालों पे लाली छाई थी |
उसे देख यही बस लगता था ,
वो पिया मिलन को आई थी |
वो पिया मिलन को आई थी ,
क्या पिया मिलन ही आई थी ?

था कोई नही उस बारिश में ,
जो उस पगली को देख सके |
बस बारिश की सह्तीरें थी ,
जो दिल की खिड़की को चीर सके |
सब कहते है वो बारिश थी ,
हम भी कहतें है वो बारिश थी |
लोगों ने देखा की नीर बहा ,
पगली के दिल का पीर बहा |
इधर – उधर वो झांक रही ,
विकल ह्रदय को ढांक रही |

मौसम ने ली तब अंगडाई ,
कुछ दूर दिखी एक परछाई |
दिल धक् से करके धड़क उठा ,
अंग-अंग उसका तड़प उठा |
मिले नयन और झुके नयन,
प्रथम मिलन ना कोई कथन |
मौन स्वीकृति दी अम्बर ने ,
बौछारें कुछ तेज हुयी |
गले मिले दो ह्रदय विकल ,
ना बात हुयी ना चीत हुयी |
प्रियतम ने मस्तक चूम लिया ,
पगली तो शरमा ही गयी |
प्रथम मिलन की इस बेला पर ,
फिर जोर जोर बरसात हुयी |
प्रणय पुनीत परम पवित्र ,
ना आंख कोई ना साख कोई |
था कोई अगर आशीष दे रहा ,
एक बरगद वृक्ष विशाल कोई ,
एक बरगद वृक्ष विशाल कोई ……..

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/10/2015

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