ग़ज़ल

आदमी हूँ , जी रहा हूँ ,
आज बोझिल जिन्दगी |
किससे कहूँ अंर्तव्यथा ,
उसको खोजे जिन्दगी |
रिश्ते अनेको हैं यहाँ पर,
लगती फीकी जिन्दगी |
जल रही है आग दिल में ,
है अधजली सी जिन्दगी |
गुत्थियों ने है दबोचा ,
आज सिहरी जिन्दगी |
न उड़ो पंकज यहाँ तुम ,
एक बुलबुला है जिन्दगी |
आदेश कुमार पंकज

4 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 02/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/10/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 02/10/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/10/2015

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