तन है अर्पण,मन है अर्पण , अर्पण है ये जीवन तुमको

तन है अर्पण,मन है अर्पण
अर्पण है ये जीवन तुमको
मातृभूमि पे हो न्यौक्षावर
रहती ऐसी कामना हमको
धन्य हुआ वह यौवन
जो मातृभूमि के काम आया
मातृभूमि के जय में शामिल
धन्य हुयी वो आवाजे
अमरत्व मिली उस लेखनी को
जिसने है गुणगान लिखे
लालायित पुष्पों का जीवन
वसुधा के श्रृंगार को
तन है अर्पण,मन है अर्पण
अर्पण है ये जीवन तुमको …..
गिरती है वो वर्षा की बुँदे
हो आनंदित इस रज कण में
हो धूल-धूसरित पवन कहीं
इठलाते है इस क्षण में
गर्वित होता है हर कोई
शामिल हो के इस जन गण में
लेते है प्रभु अवतार नया
हो व्याकुल इसके प्रेम को
तन है अर्पण,मन है अर्पण
अर्पण है ये जीवन तुमको ……

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 02/10/2015
    • omendra.shukla omendra.shukla 03/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/10/2015

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