वृक्षों के दर्द …..

बेदर्द भरी इस दुनिया में
कौन सा मेरा नाम
ये तो मेरी माटी जाने
अथवा जाने राम,
ना सुख की मै आस करू
ना करू किसी से कभी मै राग
अपनों के बीच निज जीवन चाहू
बांटते हुए सभी में अनुराग
काटते जीवन के आधारो पे
फिर कौन लगाये विराम
ये तो मेरी माटी जाने अथवा जाने राम ….
पर्ण से दू मै छाया सबको
करू मै जीवन को खुशहाल
बन आधार मै बारिश का फिर ,
पुरे करू कृषको के खयाल,
महकाउ फिजा मै फूलों से अपने
जानु फलों से मै क्षुधा का हाल,
बैर ऐसी फिर कौन -सी मुझसे ,
जानु जरा मै उसका नाम
ये तो मेरी माटी जाने अथवा जाने राम ……

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 02/10/2015

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