ये जीवन कैसा

तुम्हारे बिना ,
ये जीवन कैसा ,
जैसे शरीर हो ,
बिन प्राण जैसा .
किसके लिए माथे पर बिंदिया सजाऊँ ,
किसके लिए अपना पायल झनकाऊँ
तुम्हारे बिना ,
ये जीवन कैसा ,
जैसे मूरत हो ,
बिन रंग जैसा .
किसके लिए अपने सेज को सजाऊँ ,
किसके लिए अपने यौवन को बचाऊँ.
तुम्हारे बिना ,
ये जीवन कैसा ,
जैसे प्रेमगीत हो ,
विरहगान जैसा ,
किसके लिए मेले से खरीदूं चूड़ियाँ.
किसके लिए पहनूं कंगन बालियां .
तुम्हरे बिना ,
ये जीवन कैसा .
जैसे पंछी हो नभ में,
बिन पंख जैसा .

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/10/2015

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