“””””तन के किरायेदार””””

“”””””””तन के किरायेदार”””””

उधारी ख़ुशी की, तलाशें ज़िन्दगी
निगाहें समेटें, एक आस अनकही |
तन के किरदार का, ये जीवन किरायेदार
मोम सी पिघलती, हर साँस कर्ज़दार |

मोह-मोह से बंधा हुआ, हर लम्हा कहे पुकार
और खुदा से क्या माँगे तू, ओ तन के किरायेदार ||

कैसे हो लयबद्ध, हर साज़ ज़िन्दगी का ?
दुआओं का याचक, दरकार को किसी का |
साहिल भी हँसकर, कहे मिलूंगी कहीं ना
लेकर जो निकले हो, उधार का सफ़ीना |
डूबूँ या तैरूं, ज़िन्दगी के भंवर में
विरासत मिली है, कश्मकश ज़िन्दगी में |
कोई दौलत का झांकें, इन्सां की नज़र से
ढकता हूँ मैं साया, कर्ज़े के केहर से |

मोह-मोह से बंधा हुआ, हर लम्हा कहे पुकार
और खुदा से क्या माँगे तू, ओ तन के किरायेदार ||

गुम हूँ क्या खुदा के, इश्तहार-ए-ख़बर से ?
देखें है क्यों ना, मुझको इक नज़र से |
कैसी है ये शैयाँ, पत्थर सी मुलायम
करे सौदा जिस्म का, यहाँ रग-रग रमें यम |
कोई कर्ज़ा, कोई हर्ज़ा, है रग-रग में घुलता
नैनों का “कन्हैया”, “राधा-ए-आशा”, से ना मिलता |
यहाँ हर कोई याचक, गिरधर की नज़र में
भरे दुआओं के कर्ज़े, कर्ज़े की तरकश में |

मोह-मोह से बंधा हुआ, हर लम्हा कहे पुकार
और खुदा से क्या माँगे तू, ओ तन के किरायेदार ||

By Roshan Soni

3 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 30/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/09/2015
    • roshan soni roshan 30/09/2015

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