अपने घर के…

अपने घर के सब दरवाज़े खोल दो
बंद कमरों में गीत नहीं लिख पाऊँगा ।

नक़ाब सारे हटा दो अपने चेहरे से
वरना तुझपे ग़ज़ल नहीं कह पाऊँगा ।

ग़म को तुम छुपाते रहे ग़र यूँही मुझसे
ग़म की तेरे दवा नहीं कर पाऊँगा ।

ज़माने ने बाँध दिए हाथ मेरे ‘आलेख’
अब तेरे लिए दुआ नहीं कर पाऊँगा ।

— अमिताभ ‘आलेख’

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 30/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 30/09/2015

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