क्या कहें – ५

एक पटल पर लाकर तुमने हमको कहीं पर खड़ा किया
उन शत प्रतिशत बाधाओं को अंतर्मन में ढाल दिया
वो कहते है सब नर नर है उस नारी के जीवन मैं भी
वो नार नहीं तो जीवन क्या तुम उसको क्या बतलाओगे

पूजो हमको साँझ सवेरे जीवन के हर पथ पर तुम
दुर्गा हो या काली फिर भी अहसान जताओगे
थी अखंड में, खंड खंड कर क्यों तुमने चकनाचूर किया
क्यों राग विरह के वैभव में तुमने मुझको मजबूर किया

जब छेड़ के ताना बाना हमने इस श्रष्टि को भी दिखलाया
जीवन की हर मझदार में तुमने साथ सदा मेरा पाया

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/09/2015
    • shishu shishu 30/09/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 30/09/2015
    • shishu shishu 30/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/09/2015
    • shishu shishu 30/09/2015

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