|| आज फिर हुआ मन भारी ||

सालों से है भूले हुए हम उन तमाम यादों को,
सोचते ही आँखें भर आए जिन दुखद खयालों को,
संकल्प था कि न करेंगे उन यादों की सवारी,
पर न जाने क्यों आज फिर हुआ मन भारी |

ये यादें हैं! पर न समझो इनको तुम कम,
कि भूल पाओगे इन्हे आसानी से – ये है तुम्हारा भ्रम |
हाँ, संकल्प था कि न करेंगे उन यादों की सवारी,
पर न जाने क्यों आज फिर हुआ मन भारी |

अरे ये तो यादें हैं, न छू सकेंगी तन को,
पर देखो आज कैसे चुभ रही हैं ये मन को |
आह! संकल्प था कि न करेंगे उन यादों की सवारी,
पर न जाने क्यों आज फिर हुआ मन भारी |

क्यों न जाने कुछ यादें ऐसी रह जाती हैं,
जो घटित घटना से भी ज़्यादा तड़पाती हैं |
अरे, संकल्प था कि न करेंगे उन यादों की सवारी,
पर न जाने क्यों आज फिर हुआ मन भारी |

कुछ सिखा गयी जो तुम्हे, यादें हैं उन पलों की झाँकी,
कुछ अश्रु तो रहेंगे हरदम उन्ही यादों के लिए बाकी |
खैर, संकल्प तो था कि न करेंगे उन यादों की अब और सवारी,
पर शायद पढ़े पाठ का स्मरण कराने, आज फिर हुआ मन भारी !

10 Comments

  1. pankaj charpe Pankaj Charpe 29/09/2015
    • K Baby Sheena K Baby Sheena 29/09/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 29/09/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2015
    • K Baby Sheena K Baby Sheena 29/09/2015
  4. Abhishek Rajhans 29/09/2015
    • K Baby Sheena K Baby Sheena 29/09/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
      • K Baby Sheena K Baby Sheena 29/09/2015

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