हाथों की लकीरों ने…

हाथों की लकीरों ने क्या खेल दिखाया ।
जिनसे न मोहब्बत थी हमें उनसे मिलाया ।।

उन शोख हसीनों से ज़रा जाके तो पूछो ।
तन्हाई में अपनी न कभी उनको बुलाया ।।

वादे जो किये थे कभी हमने वो तुमसे ।
वादों को अपने न कभी हमने भुलाया ।।

हर जुर्म के बदले में हमने उसे चाहा ।
नज़रों से कभी अपनी न उसको गिराया ।।

हाथों में नहीं दम ‘आलेख’ पाँव भी थके हैं ।
महबूब मेरा क्यों मेरे सामने आया ।।

— अमिताभ ‘आलेख’

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 29/09/2015

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