बेटी का मोह -शिशिर “मधुकर”

ओ मेरी अपनी माँ की आँखों की ज्योति
तुम हो मेरे इस जीवन की सच्ची मोती
तुमको पाकर मैंने इस एहसास को जाना
पिता बेटी का भावुक बंधन क्या है पहचाना
मुझको अपनी आज ज़रुरत तेरे लिए है
मेरी इन साँसों की कीमत तेरे लिए है
आज अगर मैं कुछ भी खोने से डरता हूँ
उसके पीछे केवल कारण है मोह तुम्हारा
तुम स्वस्थ रहो, उन्नति करो और बड़ी बनों
इस जीवन में अब तो बस यही ध्येय हमारा.

8 Comments

  1. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 28/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/09/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 29/09/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2015
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015

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