प्रेम से भरा वसंत

प्रेम से भरा वसंत
प्रेम से भरा वसंत ,
पूस के कंपकंपाते ठण्ड से ,
बचाता है उन्हें ,
जो नहीं सोये थे ,
सावन के बाद .
प्रेम से भरा वसंत ,
नंगे पेड़ो के साथ .
ढँक देता है ,
उनके जिस्म पर,
अपने हवाओं का कम्बल ,
जिनके लिए कम्बल बनते ही नहीं.
प्रेम से भरा वसंत ,
sarso के खिलखिलाते चेहरों के साथ ,
बदल देता हैं ,
उनके चेहरों को भी ,
जिनकी रौनक छीन ली है ,
बुढ़ापे की झुर्रियों ने .
प्रेम से भरा वसंत ,
jaa raha है आज ,
aam की manjariyon dekar ,
jaa raha है ,
budhe जिस्म को akela chod kar
jaa raha है ,
पेड़ो को unki pattiyan dekar ,
aur ye khekar,
ab saamna karo ,
गर्मी की तपिश का ,
बिजलियों के कड़कने का ,
बारिश की तीक्ष्ण बूंदो का ,
aur saamna karo ,
पूस की kaali thandi raat का ,
मैं फिर aaunga ,
पर tum ,
mera intjaar नहीं ,
saamna karo
tum saamna karo .

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/09/2015
    • Abhishek Rajhans 29/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015

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