कभी खुश थे – शिशिर “मधुकर”

ना जाने लोग कैसे रहते हैं इतने खुश
जो हर समय खिलखिलाकर हँसते हैं
खिलखिलाहट तो रही दूर
हम तो खुशी के लिए तरसते हैं
ऐसा नहीं कि हम कभी खुश नहीं थे
या कभी खिलखिलाकर नहीं हँसे थे
एक ज़माना था जब लोग हमसे मिलते थे
तो उनके चेहरे भी हमारे साथ खिलते थे
फिर हमारी जिंदगी में ऐसा समय भी आया
जिसने हमें प्यार के एहसास को कराया
हम प्यार की गहराई में इतना उतर गए
कि अपने वज़ूद कि परछाई से भी दूर हो गए
हमें नहीं थी परवाह फिर अपने वज़ूद की
हमने तो की थी पूजा बस अपने महबूब की
हमारी जिंदगी का बन गया था सिर्फ यही मकसद
कि वो हमारे साथ रहे हर घडी और हर पग
लेकिन उसकी शख्सियत ने हमें कुछ इस क़दर तोडा
ग़मगीन कर दी जिंदगी और कहीं का ना छोडा
अब तो मेरी साँसे धूए में उड़ रही है
और जिंदगी ना जाने किस ओर मुड़ रही है
ऐसा नहीं के मैं सच्चाई नहीं जानता
और अपने आसन्न अंत को नहीं पहचानता
मैं जानता हूँ हर सच पहचानता हूँ हर सच
लेकिन मेरा ये पागल मन अब भी नहीं मानता.

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 30/09/2015
  2. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 30/09/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 30/09/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/09/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/09/2015

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