पुराने ख़त – शिशिर “मधुकर”

पढ़के पुराने खतों को तेरे यादें पुरानी याद आ रही हैं
भूलना चाहा हमने जिन्हे वो बातें सुहानी याद आ रही हैं.

एक ख़त में तूने मुझे ये लिखा था कि मैं तेरे जीवन का श्रृंगार हूँ
बरसों हैं तूने जिसको तलाशा मैं ही वो तेरा पहला प्यार हूँ
तेरी वो ढेर सारी दुआए अब भी असर तो दिखला रही हैं.

पढ़के पुराने खतों को तेरे यादें पुरानी याद आ रही हैं
भूलना चाहा हमने जिन्हे वो बातें सुहानी याद आ रही हैं.

एक ख़त में तूने मुझे ये लिखा था कि मिलना हैं तेरा मुझसे जरूरी
आखिर वो कैसा आलम था जब लगती थी बैरी हर कोई दूरी
जो आग तूने मुझमे जलाई अब भी वो मुझको झुलसा रही हैं .

पढ़के पुराने खतों को तेरे यादें पुरानी याद आ रही हैं
भूलना चाहा हमने जिन्हे वो बातें सुहानी याद आ रही हैं.

एक ख़त में तूने मुझे ये लिखा था कि मेरे सुख दुःख तेरे हैं
प्यार हैं अपना एक सच्चाई, बाकि तो जीवन के फेरे हैं
जिन आँखों में तेरी छवि थी अब भी वो आंसू बरसा रही हैं.

पढ़के पुराने खतों को तेरे यादें पुरानी याद आ रही हैं
भूलना चाहा हमने जिन्हे वो बातें सुहानी याद आ रही हैं.

शिशिर “मधुकर”

4 Comments

  1. sushil SUSHIL 02/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/10/2015

Leave a Reply