दुनिया की सच्चाई- शिशिर “मधुकर”

जीवन को तो छोड़ दिया है हमने जीना
अब तो हम दुनिया की सच्चाई जीते हैं
प्रीत का अमृत छोड़ दिया है हमने पीना
अब तो हम रिश्तों की कड़वाहट पीते हैं.
पाक साफ़ थे जब हमको सबने ठुकराया
इंसानो ने हैवानो का रूप दिखाया
जिसको दिल की जितनी गहराई से चाहा
उतना ही वो संगदिल है ये बाद में जाना
जाने ऐसा क्यूँ होता है की सत्य के आगे
दुर्योधन और भीष्म, कर्ण आ जाते हैं
कृष्ण को पाने की चाह तो रखते है सब प्राणी
लेकिन केवल अर्जुन ही उनको पाते हैं.

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. Bimla Dhillon 28/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/09/2015
  3. RAJ KUMAR GUPTA rajthepoet 28/09/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/09/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/09/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2015

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