बाप्पा तुम फिर आये हो, संग खुशियां अपने लाये हो

बाप्पा तुम फिर आये हो
संग खुशियां अपने लाये हो
कौतुहल भरे जीवन से हमारे
शांति दिलाने आये हो
जान मानस को उमंग से भर
खुशियों का शैलाब लाये हो
क्षण-भंगुर की इन खुशियों में
मन मेरा कहीं नहीं लगता है
आशीष मै चाहु जीवन भर
रोम-रोम अब यहीं कहता है |
प्रभु आप नाराज ना होना
आपसे ना मै बिछड़ूंगा
स्थापित कर टूटी कुटिया में अपने
सेवा सदैव आपकी करूँगा
नहीं रखता अंधी श्रद्धा मै औरो जैसी
कर स्थापित विसर्जित करने की ,
समक्ष आपके हो नतमस्तक
और रख दिल में पोटली कपट की
चढ़ावे में देने को मेरे पास
नहीं अब कुछ शेष बचा
पर किसी भूखे को मै रोटी ना दू
इतना भी दरिद्र ना हुआ
देखे है पंडालों में मैंने
चढ़ाते लोगो को मेवे,पकवान
पर एक कतरा उसे ना मिला
जो पंडालों के बाहर लगाये है ध्यान
भूख से अकुलाता नन्हा वो जीवन
कर रहा भ्रमण पंडालों के पास
प्रसाद का गिरा एक कतरा मिल जाये कहीं
और चरणामृत से बुझ जाये प्यास
ना लालसा कोई रखे वो
ना पकवान की रखे है आस
भेजा यहाँ जिस परमात्मा ने
रखता है उसमे अटूट विश्वास ….

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2015

Leave a Reply