प्यार अँधा या धंधा – शिशिर “मधुकर”

सुनते थे की प्यार होता है अँधा
मगर मुझको तो ये भी लगता है धंधा
यहाँ भी रोज़ बदलती हैं पूजा
है आज कोई तो कल कोई दूजा
सभी अपना ऐशो आराम खोजते है
है दौलत कितनी ये सोचते है
स्तर के भी हैं बहुत मानें
ये वो सच है जो हर प्रेमी जाने
यदि नहीं है सामान स्तर
तो वफ़ा की आशा भी ए दिल तू ना कर
गर होगी ना आशा ना होगी निराशा
ना रोएगा तू भी बन के तमाशा.

शिशिर “मधुकर”

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/10/2015
  4. C.M. Sharma babucm 22/06/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/06/2016

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