बेदर्द जमाना – शिशिर “मधुकर”

जिस दिन से तुमको देखा आँखों में बसा लिया था
सूरत को तेरी हमने इस दिल में छुपा लिया था
तेरे भोलेपन पर हम इतने दीवाने थे
तू थी शमा हमारी हम तेरे परवाने थे
पर तूने हमसे सदा नज़रें ही चुराई थी
शायद मन ही मन में तू भी भरमाई थी
हम कह ना सके कुछ तुमसे ये दोष हमारा था
लेकिन यह सच है मेरा सब कुछ केवल तुम्हारा था
फिर एक दिन मैनें तुमको दिल से पुकारा था
पर शायद सच सुनना ना तुमको गवारा था
मैंने तो हार थी मानी पर तुमने जीत बना दी
फिर तुम ही तो वो थीं जिसने प्रीत जता दी
मैं तो था एक परवाना उड़ चला शमा की ओर
और बांध ली परवाने ने दिल की दिल से डोर
हमनें तो कसमें खाई थीं जीवन भर साथ निभाने की
पर शायद थी खबर ना मुझको इस बेदर्द ज़माने की
शमा जली पर रोशन करने किसी और का गलियारा
परवाने को छोड़ गई वो जहाँ था केवल अँधियारा .

शिशिर “मधुकर”

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/10/2015

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