गरीब

किस्मत का मारा, गरीब बेचारा
आ गया रास्ते पे
बेबस और बेसहारा ।
हो न सका वह किसी का प्यारा
रहा वह हमेसा
बेबस और बेसहारा ।

एक तो वह किस्मत का मारा
गरीबो का अब कौन सहारा
लक्ष्य हो दो वक़्त की रोटी पाना
वह गरीब
बेबस और बे सहारा ।

दिन भर करता काम बेचारा
करता न आराम बेचारा
फिर भी मिला न कोई सहारा
वह गरीब
बेबस और बेसहारा ।

“पैसा भले न जमा किये, पर सुख दुख मे साथ निभाये ।
मुशकील से मुशकील घड़ियों से, लड़ना ये हमे सिखाये॥

संदीप किमर सिंह ।

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2015
  2. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 25/09/2015
  3. संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 08/10/2015

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