क्या लिखूं अब और… (नज़्म)

क्या लिखूं अब और ज़िंदगी के इन सफ़ों पर, सारे रंग तो भर चुका हूँ ।
कहाँ से लाऊँ अब और नए रंग के गुलाब ?

जब से तुम गए हो, ज़िंदगी में बस एक ही रंग है अब– “सफ़ेद” ।
बालों में भी अब तो झलकने लगा है…

कैसे उतार सकता हूँ इस रंग को मैं उन सफ़ेद कागज़ों पर; कुछ नज़र आएगा क्या भला ?

अब तो बस तलाशता हूँ गहरे स्याह रंग के कागज़, जिनमे तुम्हारी जुदाई का दर्द दफनाऊँ जो साफ़ साफ़ नज़र तो आये ।

और शायद फिर आये कहीं से कोई हवा का झोंका जो उड़ा ले जाये इन सफ़ों को तुम तक ।
जिसे कभी पढ़ के तुम लौट आओ वापस मेरी वीरान ज़िंदगी को रौशन करने…..!!!

— अमिताभ ‘आलेख’

8 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 24/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 24/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 24/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/09/2015
  4. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 25/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 25/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 25/09/2015

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