मैं साया नहीं

ऐ साए -तू क्या है ?
कहां हैं वो तेरे
चहकते हुए साथी
थी प्यारी जिन्हें
तेरी हर डाली डाली ?

” मै साया नहीं –
प्राण मुझ में अभी हैं,
कोई साथी ना मेरा
मुझे ग़म नहीं है ।
ये साथी जिन्हें तुम
साथी हो कहते,
मुझे क्या ये देंगे
ये तो खु़द हैं प्यासे ।
भटकते ये दर दर
दुपहरी के मारे,
मिली जहां छांव
वहीं भागे सारे ।”

“नहीं दोष इन का
चलन ही यह -हाय,
अन्धेरे से डरते
उजाले के साए ।
मौसम बदलते
बदल जाते रिश्ते,
बदलती हवाएं
बदलती घटाएं,
जो कल तक थे अपने
हुए वह पराए ।”

” चक्र जीवन का
यूं चलता रहेगा,
जो पतझड़ है आया
वसन्त भी आएगा ।
मैं फिर से हसूंगा
लिए फिर वो साए,
चहकता है कोई
यही मुझ को भाए ।”

—– विमल
(बिमला ढिल्लन)

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 24/09/2015
  2. bimladhillon 24/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/09/2015
  4. bimladhillon 24/09/2015

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