हमें याद करने की…

हमें याद करने की उसे फ़ुरसत नहीं है।
उसे भूल जाएँ हम हमारी फ़ितरत नहीं है।।

जिस शहर में गया है वो मुझसेे बिछड़कर।
उस शहर में गए हमको मुद्दत हुई है।।

कभी जो मिला ग़र तो बताएँगे हम भी।
उसके जाने से दिल पे जो क़यामत हुई है।।

एक बार उससे मैंने सब कुछ तो कह दिया था।
अब हाल-ए-दिल फिर कहने की हिम्मत नहीं है।।

वो आता है ख़्वाबों में ये और बात है।
दीदार उसका हो ऎसी किस्मत नहीं है।।

— अमिताभ ‘आलेख’

6 Comments

  1. bimladhillon 23/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 23/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 23/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/09/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 23/09/2015

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