अनमोल विचार

जो सोचता हूँ, वो होता नहीं l
जो होता है , वो सोचा नहीं l
फिर क्यों सोचता हूँ, सोचा नहीं l
बिन सोचे कुछ होता भी तो नहीं ll

ये तो नहीं की तन सुन्दर है,
तो मन भी सुन्दर होगा l
या किसी का मन सुन्दर है,
तो तन भी सुन्दर होगा l
तन एक फूल की तरह है,
जो एक दिन मुरझा जायेगा l
किन्तु सच्चा मन वो व्यक्तित्व है,
जो कभी नहीं मुरझा पायेगा l

कभी कभी हार में भी जीत छिपी है l
यदि उसमें किसी की ख़ुशी छिपी है ll
बच्चो के साथ खेलते हुए माँ-बाप हार जाते है l
क्योंकि उनकी ख़ुशी में वो अपनी ख़ुशी पाते है ll

क्या खोया ,क्या पाया ये समझ न पाया l
किसको हँसाया, किसको रुलाया जान ना पाया l
कौन है अपना, कौन पराया पहचान ना पाया l
क्योंकि मोह-माया में अपने को फँसा हुआ पाया ll

हर नई सुबह आशा की किरण लाती है l
दिल में एक नई उम्मीद जगाती है l
हारता वो है जो जल्दी मायूस हो जाता है l
विश्वास रखने वालों को ही जीत मिल पाती है ll

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 22/09/2015

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