गमों को भूल जाता मै [गजल]

गमों को भूल जाता मैं , मरने की खुशी होती !
सजा-ए-मौत भी मिलती , मुझे गर इश्क करने की !!

वफाओं की बनी कडियां , बता दे तूने क्यों तोडी!
क्या वर्षों की वाफायें अब , मेरे मरने की वजह होगी !!

सुहानी चांद्नी एक पल ,मुझे अब रास ना आये !
सितारों की चमक मुझको , अब एक पल नहीं भाती !!

राहें छोड देता यूं , ना गलियों की खबर लेता !!
सितमगर तू अगर आकर , एक पैगाम दे देती !!

तेरी एक पल की यादों ने , मुझे हरपल जलाया अब !
घुट-घुट के जीने से , अच्छी खुदकुशी होगी !!

अनुज तिवारी ” इन्दवार “

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 22/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 22/09/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 22/09/2015

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