मीठी. खुशबु

जब आते हो कान्हा
मेरे मन अनंगन में
दिल होता है गुलज़ार
भर जाती है मीठी खुशबु
मन में जग जाता है प्यार
हर पत्ता हर बूटा
कुछ कहते कहते रह जाता है
हलके तेज़ पवन के झोंके
हंस के ही वोः सह जाता है
आते हो जब तुम
मस्ती सी लहरा जाती है
कभी ऐसा भी होता है
दिल जाने घबरा जाता है
तोड़ के दुनिआ के बंधन
तेरी शरण में आ जाता है
आना इस जग में मेरा
यह तेरी ही रज़ा थी
कुछ खोना या पाना मेरा
इक तेरी ही अदा थी
फिर मैं क्या और मेरा क्या
लिखी तुमने ही कोई कथा थी
अब बस भी जाओ
मेरे मन आँगन में
रहे हर पल ही गुलज़ार
मीठी खुशबु के झोंकों से
दिल में जगता रहे तेरा प्यार

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 22/09/2015
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2015
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/09/2015

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