भटके – कदम ।

न जाने
किनके इंतजार में
बैठे है हम,
न जाने
किनके ख्यालों में
खोयें है हम,
न जने
किस मोड़ पर
खड़े है हम,
न जाने
किस ओर अब
चले है हम,
जिंदगी के मोड़ पर
बिखड़े है कांटे,
न जाने
किस कांटो की ओर
बढ़े है हम,
न जाने
किस आँसुओं से
घिरे है हम,
न जाने
किस मोड़ पर
खड़े है हम।

-संदीप कुमार सिंह।

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 22/09/2015
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 24/09/2015
  2. bimladhillon 22/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2015

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