निराश मन ।

बैठा हूँ आज मै
अपनी नजारे झुकाये,
बस यूं ही मैंने अपनी
यह जिंदगी बिताये,
काश कर पता मै
अब कोई भी उपाए,
जिंदगी मे कभी न राहूँ
मै असहाये।

जिंदगी है जीना पर
कोई रास न आये,
बैठा हूँ अकेला आज
क्यों कोई पास न आये ?

जिंदगी लगाने लगी है बोझ
कैसे इसे समझाऊँ,
नौकरी जब न मिले तो
बैठे-बैठे अब यूं ही मर जाऊँ।

-संदीप कुमार सिंह।

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 22/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2015

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