अधूरा सपना ।

समय का होता मुझपे
बार-बार प्रहार,
मजबूरीयों में गिरता-पड़ता
मै हूँ बेहाल,
काम न आऐ मेरा
कोई भी यार,
फिर भी मै करता
सब से प्यार, सब से प्यार।

चला जाता हूँ मै रोज़
सपनों के पार,
पर हो न पाए मेरा
सपना साकार,
कुछ ऐसा काम तू
कर मेरे यार,
अपना सपना तू
कर ले साकार।

हम तो यहाँ से निराश चले,
अब आई तुम्हारी बारी,
जो करना है आज कर,
समाय चला जाए न खाली।

-संदीप कुमार सिंह।

Leave a Reply