वो दो-चार पल ।

जब मिले थे हम तुमसे,
सोंचा न था यह हमने,
हो जाएगी हम दोनों में,
अच्छी और प्यारी सी दोस्ती ।

जबसे हुई मुलाक़ात हमारी,
तुम ही सुबह और शाम हमारी,
कभी इतराती, कभी नखरे दिखती,
बात-बात में यूं रूठ है जाती ।

जिस दिन तुम नहीं आती हो,
उस दिन मै उदास हो जाता हूँ,
बस तुम्हें याद करता हूँ,
और यूं ही बैठा रहता हूँ ।

साथ बिताए जो दो पल हमने,
बस याद उसी को करता हूँ,
जब याद तुम्हारी आती है,
मै यूं ही बैठा रहता हूँ ।

दिन बीत गई खुशियों की अपनी,
अब दुख की घड़ियाँ आयी,
पुरानी यादों को लेकर मैंने,
अब साता दिन है बितायी ।

-संदीप कुमार सिंह।

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