कल-कल करती बहती नदियाँ

कल-कल करती बहती नदियाँ
अपना राग सुनाती है
निर्मल स्वच्छ जलो से अपने
हम पे स्नेह लुटाती है
मिठास समेटे जलो में अपने
सबका कल्याण रचाती है
अमृतरूपी जल की बुँदे
जीवन सभी का बचाती है
कल-कल करती बहती नदियाँ…
मेघो से कर प्राप्त जलो को
लोगो तक पहुँचाती है
बेजान हुए उपवन को
जीवन नया दिलाती हु
हो कूपों ,तालों में तब्दील
उमंग सकल सृष्टि में बरसाती है
कल-कल करती बहती नदियाँ….

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