सिसक-सिसक कर आंसू रोते

सिसक-सिसक कर आंसू रोते
आँखे कहती है धिक्कार
शर्मसार हो गयी मानवता आज
अपने ही टूटे आँगन में
मरने से ज्यादे है दुःख बिछड़ने का
जी लेते काश ! माँ तेरे संग हम
पल दो-पल पास अगर होते
सिसक-सिसक कर आंसू रोते…..
दूर जा रही हु ,तुझसे माँ
पर ना दिलों से दूर कभी होउंगी
फिरूँगी अपने आँगन में मै,
औ भाई से ना बिछड़ूंगी
रहूंगी तन से दूर भले मै
पर मन से कभी न तुझे बिसरुंगी
मौत से भी मै लड़ लेती माँ
पास अगर जो तुम होते
सिसक-सिसक कर आंसू रोते….
अगले जनम मै फिर आउंगी
गोंद को तेरे फिर सजाऊँगी
प्यार अधूरा रह गया जो जीवन में
पूरा अगले जनम मै कर जाउंगी
पर वादा करना माँ तुम मुझसे
आंसू कभी ना फिर तुम बहाओगी
आँखे आज न फिर नाम होती ,
पापा साथ जो तुम मेरे होते
सिसक-सिसक कर आंसू रोते….

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