ग़रीब

बड़ी तंगहाली में यहाँ ग़रीब गुज़र करता है।।

जो खता की ही नहीं उसी की सजा में,
सारी ज़िन्दगी यहाँ गरीब गुज़र करता है।

हर सख्श देखता है इन्हें नफ़रत की नज़र से,
ऐसे हालात में यहाँ ग़रीब गुज़र करता है।

बड़ी तंगहाली में यहाँ गरीब गुज़र करता है।। 1

फूल से भी कोमल हाथ हैं इनके,
फिर भी काँटों में ग़रीब गुज़र करता है।

लोगों की मतलब परस्त नज़रों की वजह से,
सहमा-सहमा सा यहाँ गरीब गुज़र करता है।

बड़ी तंगहाली में यहाँ गरीब गुज़र करता है।। 2

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