मधुर क्षण

दूर – अन्धेरे में चलते-चलते
जब कभी कोई चिन्गारी-
जुगनू सी जल उठती है-
घन्टों से अपलक टिकी-
मेरी तन्त्रा को – एक
सुखमय झटका सा दे जाती है ।

क्षुब्ध तन्त्रा के तार टूट जाते हैं –
पल में -फिर जुड़ जाते हैं-
इक ऐसे चिरसिमृत क्षण से
जिस की मात्र कल्पना –
मधुर सी सिहरन
भर जाती है -तन में, मन में ।

पल में अन्धेरे छट जाते हैं –
आंसू शबनम बन जाते ,
सन्ध्या ढलते सूरज में –
सुबह की लालिमा भर जाते
बीते दो पल विमल स्नेह के
जीवन डगर सजा जाते ।

. — विमल
(बिमला ढिल्लन)

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/09/2015
  2. bimladhillon 17/09/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/09/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 17/09/2015
  4. Bimla Dhillon 18/09/2015

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