खादी की जमीर बिक गयी , बिक गया खाकी का ईमान

खादी की जमीर बिक गयी
बिक गया खाकी का ईमान
फिर भी शान से कहते है हम
मेरा भारत देश महान ,
बिकने को इंसाफ खड़ा है
पर भाव अभी ना सही मिला है
इंसाफ का तराजू तौले है आज
नोटों के बदले में बेईमान
जज लगाये इंसाफ की बोली
कठघरे में खड़ा है संविधान
खादी की जमीर बिक गयी
बिक गया खाकी का ईमान….
हो भागीदार मिडिया अपना
धर्मो को सभी लड़ाता है
कागज के चंद टुकड़ों के खातिर
झूठी अफवाहे फैलाता है
अफसर करता ना अपना काम
चौराहे पे करता खुद की वर्दी को नीलाम
खादी की जमीर बिक गयी
बिक गया खाकी का ईमान….
विकास भरे आश्वासन से
चुनाव को जीत जाते है ,
फिर खुद अराजक बन
वो हमसे भौह लड़ाते है
लूट अपनी ही जनता को
खुद की शान बढ़ाते है
पैसे पे तौल गया है आज
कोई भारत का सम्मान
खादी की जमीर बिक गयी
बिक गया खाकी का ईमान……..

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया DK Nivatiyan 16/09/2015
  2. कंवर करतार 'खंदेह्ड़वी' 16/09/2015
    • omendra.shukla omendra.shukla 16/09/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir 16/09/2015

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