उम्मीद

उम्मीद… जगता हुआ सूरज है
उम्मीद… मंझा हुआ धीरज है
राख में दबा अंगार है
तितलियों का सिंगार है
उम्मीद ओस की दौलत है
मेहबूब की मिन्नत है
सपनों को बोना है उम्मीद
डर का खोना है उम्मीद
खुलती हुई गुत्थी उम्मीद है
तारों भरी मुट्ठी उम्मीद है
अंधेरे में चिराग है
भूलभुलैय्या का सुराग है
विश्वास का सच्चा सोना है
उम्मीद, ईश्वर का होना है

– अमोल गिरीश बक्षी

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 16/09/2015
    • amolbol amolbol 16/09/2015
  2. maharshi tripathi maharshi tripathi 16/09/2015
    • amolbol amolbol 16/09/2015

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