बेटी बा तs जीवन बा(भोजपुरी कविता)

आत्म:चिंतन
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बड़ा पुरान एगो कहानी बा
बाकिर बड़ा सुहानी बा
फुरसत मिले तs सुनाई हम
इज़ाज़त दs तs गुनगुनाई हम
रहे नादान एगो चिरई अंजान एह दुनिया से
ना रहे केहू ओकर ना पहचान एह दुनिया से
जाने कहवा से आईल
माई के कोखिया में समाईल
जबले कोखिया में रहे
बड़ा मस्ती करे
उहे संसार ओकर रहे स्वर्ग सा
रहे माई के मिलत नर्म स्पर्श सा
रोज माई के आपन उ धड़कन सुनावें
निमन बानी माई,इ कहके बतावे
सुन माई भी तनिको ना फुला समात
रोज कोखिया के चिरई के छु के मुस्कात
दिन पे दिन जब बढल
रात केतना ढलल
सबके अवाज़िया सुनल
चिरई चहके लगल
अब दिन आयिल चिरई के पंख फइलावे के
अपना दुनिया से हमनी के दुनिया में आवे के
रोज सपना नया उ सजावे लागल
गीत गावेलागल गुनगुनावेलागल
सोचेलागल माई के होई दुनिया कईसन
जइसन बानी रहत का होई वइसन
माई केतना हमार हमके मानली हो
जान से बढ़के हमरा के जानेलि हो
हम तs पापा के अपना ना देखनी कबो
हम जायेम तs पहिले उनसे मिलेम
माई जइसन ही प्यार करेम रउरो, कहेम
फिर उ दिन आ गईल
उ समय आ गईल
चिरई धरती पे आईल
लागे सरग पा गईल
लेके माई के नाम उ तs आईल रहे
माई मुआला से जिअली जे माँ माँ कहे
अब तs लागे की सगरो दुःख भुला गईली हो
अपना नन्हकी चिरईया के जे पा गईली हो
पापा सुनते ही कहले
मोर लक्ष्मी हई
अब ना दुनिया में हमरा
कमी कुछहु रह गईल
जेतना मंगले रही हम विधाता से तब
ओहसे जादा लागे हमरा आज मिल गईल
पापा सगरो मिठाई बाटावें लगले
बाबा दुआरा पे कीर्तन कहावें लगले
मामा कहले की हमरो ख़ुशी बा भईल
आज से हमारा भगनी के नाम भी ख़ुशी हो गईल
चिरई देख देखि सब, खाली
रोवते रहस
मन ही मन माई के
उ धन्यवाद कहस
धन्य बाड़ू ए माई
और ई पूरा परिवार
जवन बेटी से अपना
करे एतना प्यार
मने मन भगवान से
उ करस गोहार
रखिह हरदम सलामत
अईसन परिवार
काश संसार सगरो,
अईसने भईल रहित
एको बहिन के हमरा ना
खून बहित
नाही कोखिया में मारित
केहू बेटी के
हमरे खानी ओहूलोग के,
जन्म भईल रहित
करी ईहे गोहर
हम वीनती तोहार
बाटे करुण पुकार
बाटे अर्जी हमार
अब से हर बेटी के जन्म लेवे दियाव
सारा इंसान दुनिया के कसम इहे खाव
ना तs संसार एक दिन वीरान हो जाई
बिना बेटी के जग सुनसान हो जाई।
देखि सगरो ई घटना मन मचल सा गईल
पूरा देहिया हिलल हलचल सा भईल
हमहू आज एगो प्रण ई उठावतानि
आज से हर बेटी के बचावे के बा
अब ना हत्या होयी कौनो मासूम के
एह धरती पे हर लड़की के लियावे के बा।
बेटी बा तs जीवन बा
जिंदगानी बा
बडा पुरान एगो कहानी बा
बाकिर बड़ा सुहानी बा।

प्रभात रंजन
उपडाकघर रामनगर
प0 चम्पारण(बिहार)12038541_910452722370614_1009352770956219389_n

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2015

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