जी उठी मैं

ताँता यादों का
बहा ले गया
आया इक रेला
और कहाँ ले गया
बरसों की यादें
बदली क्षणों में
जी उठी मैं
जैसे उन पलों में
तितलिओं का उड़ाना ,
झरनो का बहना
अपलक सा ताकना
और पलक न झपकना
तारों भरी रात में
इक जादू का चलना
बिखरी हुयी चांदनी का
आँचल में सिमिटना
और रात की रानी का
मंद मंद. महकना.
इक नक़्शा जाने कैसा
खिंच सा गया
बीते पलों में
उड़ा लेगया
सुहानी हैं यादें
कुछ पुरानी
जी उठती हूँ मैं
है बीती कहानी
आती रहती हैं अक्सर
मूंदी पलकों में वो
विचरती रहती हूँ मैं
मीठे सपनों में खो
याद आती हैं बहुत
प्यारी प्यारी सी यादें
बीते पलों की
बीती वो यादें

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2015
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 27/11/2016
  2. डी. के. निवातिया DK Nivatiyan 16/09/2015
    • kiran kapur gulati 27/11/2016
    • kiran kapur gulati Kiran kapur Gulati 10/07/2017

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