अंधे हो गए………….



गूंगो बहरे पहले से थे,
अब अंधे भी गए !
पढ़े लिखे नौजवान देखो,
भक्त अंधे हो गए !!

सच्चाई से नही लेन-देन,
झूठे वादो में खो गए !
सोच समझ से काम न ले अब,
लकीर के फकीर हो गए !!

पहले तो थे हम अनपढ़ गंवार ,
इसलिए पीछे रह गए !
आज हुए हम शिक्षित विद्वान,
चापलूस बनकर रह गए !!

कल तक जिन्हे अपना समझा
आज वो पराये हो गए !
हुआ असर धन दौलत का इस कदर
रिश्ते जिनमे कहीं खो गए !!

इस कदर भटके है लोग आज
उसूलो से बहक गए !
भूल गए संस्कार और संस्कृति,
विकृति के हवाले हो गए !!

गूंगो बहरे पहले से थे,
अब अंधे भी गए !
पढ़े लिखे नौजवान देखो,
भक्त अंधे हो गए !!
!
!
!
!! डी. के. निवातियाँ !!

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2015
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2015
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 17/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/09/2015

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