मोहब्बत एक जबान

इश्क जब दो दिलों में होता है
बात हर सुबह शाम होती है
मुँह से कुछ भी कोई नहीं कहता
मोहब्बत खुद एक जबान होती है.
दर्द जब एक दिल में उठता है
कलेजा दूसरा भी दुखता है
ख़ुशी जब एक मन में आती है
मस्तियाँ दूजे पे छा जाती हैं.
भीड़ जब चारो ओर बढ़ती है
शर्म की दीवारें खड़ी होतीं हैं
तुझसे मिलने की हंसीं आस लिए
बिन आँसू ये आँख रोती हैं.
लब कुछ यूँ खुले रह जाते हैं
जैसे अरमानों को बताते हैं
चहरे पे लाज का घूँघट ओढ़े
कितने ही रंग गुजर जाते हैं.
उठ के चले जाने में भी
फिर से मिलने की बात होती है
मुँह से कुछ भी कोई नहीं कहता
मोहब्बत खुद एक जबान होती है.

शिशिर “मधुकर”

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