मैं चला जाऊंगा, छोड़कर ये दुनिया – (चंद्रकांत सारस्वत)

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मैं चला जाऊंगा
मैं चला जाऊंगा, छोड़कर ये दुनिया
मुझको पता है तू आयेगी,
‘मौत’ मुझको पता है तू ज़रूर आयेगी,
मैं मना नहीं कर पाऊंगा, रोक नहीं पाऊंगा तुझको,
मिटनी है हर किसी की दुनिया,
जिंदगी के ये मैले, यू ही चलते रहेंगे,
मेरे होने और ना होने से कोई फ़र्क नहीं है
मैं चला जाऊंगा, छोड़कर ये दुनिया

जब वो मेरा अपना प्रिय गया था तब
सोचता था क्या अब जी पाऊंगा मैं?
मगर जीया, अकेला चला, जितना चल सका
पहले तो अक्सर तेरे बारे में सोचकर डर लगता था,
पर अब मौत तू ही तो एक अपनी नज़र आती है
मैं अकेला हूँ, आज कोई महफिल में नहीं है
पर मुझको पता है, तू ज़रूर मेरे पास आएगी
तू ना गरीब देखती, ना अमीर देखती,
सबको लेने आती है,
सबके दर्द को खत्म कर, मुक्ति मार्ग दिखाती है
दर्द देती है बस ज़िन्दगी, तू तो दर्द खत्म कर जाती है,
तू आयेगी और मेरा वादा है, मैं तेरे साथ जाऊंगा

मेरा घर का पता ना मिले, तो परिंदों से पूछ लेना,
सुबह-शाम जिस घर पर, इनका आना होता है वही घर
दो गिलहरियाँ तो मेरे हाथ से ही रोटी खाती हैं,
अक्सर हम तीन, एक-दूजे से बातें करते हैं,
पर, मेरे जाने के बाद
क्या होगा इनका, भला किस पर आज इतना वक़्त है
जो इन बेजुबानों के बीच गुजारे,
मेरा क्या है, यार दोस्त हैं नहीं, उनको तू ले ही गयी,
खाली आदमी, खाली जिंदगी, किसी काम का नहीं
सारा दिन, बस ख्यालों में उलझा रहता हूँ,
सुन मौत, मुझको तो पता नहीं, पर कोई मेरे जैसा हो
तो इन परिंदों और दो गिलहरियों को उनका पता बता दे,
किसी और से तो नहीं, मगर बस इन्हीं से एक लगाव हो रखा है
मेरे दिन इन सभी के सहारे और
रात तेरे इंतज़ार में कटती है ‘मौत’,
एक ये मेरे हैं और एक तू मेरी है
तू आये तो इनको कोई खबर ना हो बस
बेचारे मेरे बाद कहीं, मेरे जैसे ना हो जाएँ,
कि तेरा इंतज़ार करते रहें,
मुझको पता है तू आयेगी,
जरुर आएगी और मैं चला जाऊंगा…

(चंद्रकांत सारस्वत)- लेखक…14-09-15

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/09/2015
    • chandrakant saraswat chandrakant saraswat 15/09/2015

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