सुनो गौरैया

सुनो गौरैया

गौरैया क्या अब नहीं आओगी !
सोनचिरैया क्या शहर छोड़ जाओगी !!

भोर करती तुम्हारा इंतजार ,
पत्ते पत्ते को है तुमसे प्यार ,
बालसूर्य की तुमसे मुलाकात ,
उजला गीत न चहचहाओगी ,

गौरैया क्या अब नहीं आओगी !
सोनचिरैया क्या शहर छोड़ जाओगी !!

बचपन के तुमसे हैं गहरे नाते ,
आँगन में चावल डालना स्कूल जाते जाते ,
आँखे खुलते ही तुम्हारा फुदकना ,
शहरी बचपन सूना कर जाओगी

गौरैया क्या अब नहीं आओगी !
सोनचिरैया क्या शहर छोड़ जाओगी !!

माना शहरों के अंदाज बदल गए ,
इंसान को नए खिलोने मिल गए ,
पर तुम तो सदा की लक्ष्मी हो पाखी ,
नानी दादी की कहानियों से कैसे निकल पाओगी ,

गौरैया क्या अब नहीं आओगी !
सोनचिरैया क्या शहर छोड़ जाओगी !!

तुम हो तो पवन अमृत है , निर्मल है ,
तुम हो तो जीवन शुभ है , अविरल है ,
काश की इंसान को समझ आ जाए ,
दूषित वातावरण तुम न सह पाओगी ,

गौरैया क्या अब नहीं आओगी !
सोनचिरैया क्या शहर छोड़ जाओगी !!

डॉ दीपिका शर्मा

4 Comments

  1. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 15/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/09/2015
  3. डी. के. निवातिया D K Nivatiyan 15/09/2015
  4. Dr Deepika Sharma Dr Deepika Sharma 19/02/2016

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