कब होगा मेरे भी भीतर सत्य का अवतरण ।

कब होगा मेरे भी भीतर सत्य का अवतरण ।

एक एकेला राही चलता है उस मार्ग पर ,
आएगी एक न एक दिन वो घडी इस आशा को बांधकर ,
खुदको जानने की है तलब ,लिए मन में एक ही स्मरण ,
कब होगा मेरे भी भीतर सत्य का अवतरण ।

हुए बुद्ध मौन जिससे ,बजी है कृष्ण की बासुरी ,
गीत उठा है नानक में ,तो नाच उठी है मीरा ,
निकली कविताये येशु से ,तो हुए महावीर विनम्र स्वभाव से ,
कभी मोहम्मद की सरलता ,तो कभी कबीर की अमृतवाणी ,
है साकार जिससे सारा जगत ,ऐसे सत्य की महागाथा ,
हु जानने को मेँ बैचैन ,इसीलिए मन में लिए एक ही स्मरण ,
कब होगा मेरे भी भीतर सत्य का अवतरण ।

न शाष्त्र से ,न बुद्धि से ,न किसी के कहने से ,
जानना है तो केवल स्वय के अनुभव से ,
अहंकार है बाधा जिसकी ,छुट जाये वो पार है ,
परमानन्द के सागर में डूब जाने को जो तैयार है ,
चाँद पहुंचे ,मंगल पहुंचे फिर भी लगता है कुछ कम ,
एक खुद को छोड़ के हर जगह पहुंच गए है हम ,
दुःख के इस संसार में प्रतिपल मेरा एक ही स्मरण ,
कब होगा मेरे भी भीतर सत्य का अवतरण ।

अहंकार की इस दौड़ में ,दौड़ रहा हु मेँ ,
जहा पहुचता वही शुरुवात,मानव की कल्पना का है यह विस्तार ,
इसमें बुनियाद का शिखर नहीं,जीवनभर की चिंता ,
बेवजह जी रहा हु ,जीने में नहीं कोई सार्थकता,
जो पाना था पाकर भी संतोष नहीं ,हर बार सोचता हो जायेगा सब सही ,
पता चला है जीवन के अंत में सब छूट जायेगा हाथ लगेगा कुछ नहीं ,
जानना चाहता हु उसे जो कभी नही छूटेगा ,इसीलिए करता हु एक ही स्मरण ,
कब होगा मेरे भी भीतर सत्य का अवतरण ।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 12/09/2015
    • pankaj charpe pankaj charpe 12/09/2015

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