मैं ऐसा ही हूँ

ज़िन्दगी की राहों पर ,
राहगीरों को देखते-देखते ,
खुद खड़ा रह जाता हूँ.
दुसरो को खुद से आगे निकलते ,
देखता रह जाता हूँ .
दूसरों की जीत पर ,
मिठाइयाँ बांटता रह जाता हूँ .
अपनी हार पर भी ,
hansta रह जाता हूँ .
खुद lutkar भी ,
दूसरों पर लुटाता रह जाता हूँ .
शायद meri किस्मत भी ,
mujhe हारता देखना चाहती है .
मेरे हारने से अगर ,
kisi ka bhala ho to ,
hamesa हारना चाहता हूँ .
bas इसी कारण ,
औरो को lagta है की ,
main kuch alag हूँ
main nahi चाहता ,
har baaji main hein jitu ,
main to har haari baaji जितना चाहता हूँ ,
अपनी किस्मत की lakiro को
खुद hein badlna चाहता हूँ.

3 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 11/09/2015
    • Abhishek Rajhans 19/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/09/2015

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