तेरा ख्याल

तेरा ख्याल दिल को सुकून दे रहा है
तू चाहे न चाहे ये हो रहा है
मोहब्बत पे जोर चला कब किसी का
दुनिया में सदियों से ये हो रहा है।
मेरे दिल की सूनी ये तपती दुपहरी
तकती थी छाया इक ठण्डी घनेरी
तुम उसमें महकी पवन बन के आई
उमंगे तरंगे फिर कसमसाई
घिर आए बादल बरसता है पानी
फिर से मचलने लगी जिन्दगानी
सूखे दरख्तों ने घेरा था जिसको
आलम वो सारा जवाँ हो रहा है।
तेरा ख्याल दिल को सुकून दे रहा है
तू चाहे न चाहे ये हो रहा है
मोहब्बत पे जोर चला कब किसी का
दुनिया में सदियों से ये हो रहा है।
जीवन मे करता जो तन मन समर्पण
छवि उसकी गढ़ता है ये दिल का दर्पण
आँखें भी उसकी सदा राह तकती
नाम ले लेके उसका जुबां भी ना थकती
कोई तुमको समझे जब तन का गहना
ऐसी मोहब्बत का यारों क्या कहना
लम्हों के ऐसे सपने संजोए
जीवन ये सारा फ़ना हो रहा है।
तेरा ख्याल दिल को सुकून दे रहा है
तू चाहे न चाहे ये हो रहा है
मोहब्बत पे जोर चला कब किसी का
दुनिया में सदियों से ये हो रहा है।

शिशिर “मधुकर”

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