मंज़िल मिले या मौत!

उठ चलो ऐ नौजवान
मंज़िल मिले या मौत
उठ चलो ऐ किसान
मंज़िल मिले या मौत
उठ चलो ऐ मेहनतकश जवान
मंज़िल मिले या मौत

मत भूलना उस शहीद-ऐ-आज़म को
जिसने घर जिन्दगी छोरी
आज़ाद समाज बनाने को
हमें भी बढ़ते चलते जाना है
मंज़िल मिले या मौत

हम भी लड़ते-चलते जायेंगे
अपनी बात बताते जायेंगे
फिर रास्ते में
अर्चन मिले या अंगारे
बढ़ते चलते जाना है
मंज़िल मिले या मौत!

Leave a Reply