तेरा मेरा

क्या कुछ कम है
क्या कुछ ज़्यादा
बाँट के ले लो
आधा Aadha
हो नियत साफ़
तो कैसी बाधा
तेरा है यह मेरा है
इस बात ने
सबको घेरा है
थल को बांटा
जल को बांटा
नभ पर भी
डाला डेरा है
बांटा होता
प्यार कभी तो
रहते मगन
न होते गम तो
सुन्दर होती
दुनिआ सारी
कहते सब
कितनी न्यारी
न कहते फिर
क्या तेरा है
क्या मेरा है
जीवन तो बस
इक फेरा है
इक दिन तो
उड़ जाना है
लेकर साथ
क्या जाना है
फिर क्यूं सोचें
क्या कुछ कम है
क्या कुछ ज़्यादा
क्यूं न बाँटे
सब आधा आधा

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया D K 10/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2015

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