फ़िक्र

थोड़ी फ़िक्र करो मुल्क की,
मजहबी लड़ाइयां छोड़ो यारों।।

दूसरे मुल्क तरक्की के लिए लड़ रहे,
तख्तोताज की लड़ाइयां छोड़ो यारों।।

दूसरों को क्यों गुनहगार ठहराते हो,
पहले खुद गुनाह करना छोड़ो यारों।।

थोड़ी फ़िक्र करो मुल्क की,
मजहबी लड़ाईयां छोड़ो यारों।।

5 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 09/09/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 09/09/2015
  2. डी. के. निवातिया D K 10/09/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 11/09/2015
  3. swetarchi 11/09/2015

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