==* चाहत *==

ताउम्र बस तुम्हे चाहने की चाहत है
सातो जनम साथ तेरा पाने की चाहत है
गर खुदा है जन्नत मे बैठा कही पर
उससे तुम्हे मेरी मांगने की चाहत है

हुस्न का दीवाना तेरी रूह बन जाऊँ
कशिश मे खुदको लुटाने की चाहत है
दूरिया जो लिखी हम दोनो के दरमियां
हरएक दुरीयो को मिटाने की चाहत है

तुझे खबर कहाँ हाल-दिल ऐ हसीं
बयाँ एक बार बस करने की चाहत हैं
मुकद्दर बदलकर तू होगी एक दिन मेरी
किस्मत की लकीरों में लिखने की चाहत हैं
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✒ शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्रमनध्वनी – ९९७५९९५४५०

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया D K 09/09/2015
  2. शशिकांत शांडिले SD 23/11/2015

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